International volunteers who strongly aided ukraine against war with russia.

रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल हो चुके हैं. यूक्रेन की सेना को न सिर्फ अपने सैनिकों पर बल्कि उन बाहरी लड़ाकों पर भी गर्व है जो उसकी तरफ से रूस के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं. यूक्रेनी सेना से ज्यादा ये बाहरी लड़ाके पुतिन के लिए सिरदर्द बने हुए हैं. दावा ये भी किया जा रहा है कि ये लड़ाके हर दिन करीब 1200 रूसी सैनिकों को मौत के घाट उतार रहे हैं.

दरअसल साल 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दुनिया भर के लोगों से मदद की अपील की थी. उनकी इस भावनात्मक अपील के बाद हजारों विदेशी लड़ाके यूक्रेन की रक्षा के लिए पहुंच गए. इनमें कुछ अनुभवी थे, तो कुछ बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के केवल जोश और जुनून में शामिल हो गए.

यूक्रेन के असली हीरो, पुतिन के लिए सिरदर्द

इन सैनिकों की संख्या 4 हजार से लेकर 20 हजार तक है. यूक्रेनी सेना के लिए अचानक इतनी बड़ी संख्या में विदेशी लड़ाकों को शामिल करना आसान नहीं था. शुरुआत में सेना के पास इनके लिए सही ट्रेनिंग और संगठनात्मक ढांचा नहीं था. मगर फिर समय के साथ यूक्रेन ने इन लड़ाकों को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना लिया. खासतौर पर वे विदेशी सैनिक, जो पश्चिमी हथियारों को अच्छी तरह समझते थे और युद्ध चिकित्सा में कुशल थे.

इन विदेशी लड़ाकों में कुछ तो ऐसे थे, जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपनी काबिलियत साबित की और यूक्रेनी सेना के भरोसेमंद बन गए. वे न केवल मोर्चे पर डटे रहे, बल्कि यूक्रेनी भाषा और संस्कृति को भी अपनाया. ऐसे लड़ाकों को वहां असली हीरो कहा जाने लगा.

कौन बने यूक्रेन के लिए बोझ?

हर विदेशी लड़ाका यूक्रेन के लिए फायदेमंद साबित नहीं हुआ. कुछ लोग बिना किसी अनुभव के सिर्फ रोमांच की तलाश में वहां पहुंचे. कुछ ऐसे भी थे, जो अपने देश की परेशानियों से बचने या खुद को साबित करने के लिए यूक्रेन पहुंचे थे. शुरू में इनकी वजह से कई बार यूक्रेनी सेना की लोकेशन लीक हुई, जिससे रूस को फायदा मिला.

इसके अलावा, कुछ ऐसे लोग भी थे जो यूक्रेनी सेना का हिस्सा बने बिना केवल सैन्य वर्दी पहनकर घूमते रहे. ये लोग सुरक्षित शहरों में कैफे और होटलों में देखे जाते, लेकिन असली युद्ध क्षेत्र से कोसों दूर रहते.

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